इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0: भारत की नई तकनीकी क्रांति और मैन्युफैक्चरिंग का भविष्य
दुनिया भर में आज जो भी तकनीक हम इस्तेमाल कर रहे हैं—चाहे वह आपकी जेब में रखा स्मार्टफोन हो, सड़कों पर दौड़ती इलेक्ट्रिक कारें हों, या फिर रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक हथियार—उन सभी का 'दिमाग' सेमीकंडक्टर चिप्स ही होते हैं। दशकों तक इस क्षेत्र पर ताइवान, दक्षिण कोरिया, चीन और अमेरिका जैसे गिने-चुने देशों का ही एकाधिकार रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकती है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण हमने हाल के वर्षों में देखा है। इसी वैश्विक निर्भरता को खत्म करने और खुद को एक 'चिप मैन्युफैक्चरिंग हब' के रूप में स्थापित करने के लिए भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0' की आधिकारिक घोषणा की गई है। यह कदम महज एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty) सुनिश्चित करने का एक मजबूत आधार है।
सेमीकंडक्टर चिप्स: 21वीं सदी का नया 'तेल'
जिस तरह 20वीं सदी में तेल (Oil) ने दुनिया की भू-राजनीति (Geopolitics) और अर्थव्यवस्था को नियंत्रित किया, उसी तरह 21वीं सदी में सेमीकंडक्टर डेटा और टेक्नोलॉजी की दुनिया को चला रहे हैं। एक छोटी सी सिलिकॉन चिप के बिना कोई भी डिजिटल उपकरण काम नहीं कर सकता। भारत का सेमीकंडक्टर बाजार काफी तेजी से बढ़ रहा है और एक अनुमान के मुताबिक 2030 तक इसके 100 से 110 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत के लगभग सभी चिप्स आयात करता है। इतनी बड़ी मांग को देखते हुए घरेलू स्तर पर निर्माण करना न सिर्फ आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ISM 1.0 की सफलता: नींव का निर्माण
ISM 2.0 को समझने से पहले इसके पहले चरण, यानी ISM 1.0 के सफर को देखना जरूरी है। 2021 में जब सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹76,000 करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी, तब दुनिया इसे संदेह की नजर से देख रही थी। लेकिन दिसंबर 2025 तक आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल गई। देश के 6 अलग-अलग राज्यों में ₹1.60 लाख करोड़ के निवेश वाले 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है।
गुजरात के साणंद में माइक्रोन (Micron) का $2.5 बिलियन का प्लांट काम कर रहा है, जो असेंबली और टेस्टिंग (ATMP/OSAT) का एक शानदार उदाहरण है। इसके अलावा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और सीजी पावर जैसी भारतीय कंपनियों ने भी फैब्रिकेशन और पैकेजिंग यूनिट्स स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। ISM 1.0 का मुख्य काम भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की नींव रखना और वैश्विक कंपनियों को यह विश्वास दिलाना था कि भारत चिप निर्माण के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल जगह है। यह लक्ष्य काफी हद तक हासिल कर लिया गया है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 का उदय
नींव तैयार होने के बाद अब बारी इमारत खड़ी करने की है। बजट 2026 में लॉन्च किया गया ISM 2.0 सिर्फ असेंबली या पैकेजिंग तक सीमित नहीं है। यह योजना चिप निर्माण के हाई-वैल्यू सेगमेंट यानी सबसे महत्वपूर्ण और जटिल हिस्सों पर केंद्रित है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब भारत केवल बाहर से आए वेफर्स (Wafers) को असेंबल नहीं करेगा, बल्कि खुद की तकनीक, कच्चा माल और मशीनरी विकसित करेगा।
ISM 2.0 के मुख्य उद्देश्य और फोकस एरिया
- स्वदेशी उपकरण और कच्चे माल का निर्माण (Equipment and Materials): सेमीकंडक्टर बनाने के लिए अत्यंत शुद्ध रसायनों, विशेष गैसों और करोड़ों डॉलर की महंगी मशीनों (जैसे लिथोग्राफी मशीन) की जरूरत होती है। अभी तक इसके लिए भारत पूरी तरह विदेशी सप्लायर्स पर निर्भर है। ISM 2.0 के तहत भारत में ही इन मशीनों और कच्चे माल के निर्माण को भारी प्रोत्साहन दिया जाएगा ताकि विदेशी सप्लाई चेन में रुकावट आने पर भी भारत की फैक्ट्रियां चलती रहें।
- फुल-स्टैक भारतीय आईपी (Full-Stack Indian IP): यह ISM 2.0 का सबसे क्रांतिकारी पहलू है। आईपी (Intellectual Property) का मतलब चिप के डिजाइन और उसके आर्किटेक्चर से है। आज दुनिया में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर चिप्स का डिजाइन आर्म (Arm) या x86 आर्किटेक्चर पर आधारित है जिन पर विदेशी कंपनियों का पेटेंट है। भारत सरकार अब भारतीय इंजीनियरों और स्टार्टअप्स को पूरी तरह से स्वदेशी 'फुल-स्टैक' चिप डिजाइन विकसित करने के लिए वित्तीय मदद दे रही है। इससे भविष्य में जो चिप्स बनेंगे, उनका मालिकाना हक भारत के पास होगा।
- हाई बैंडविड्थ मेमोरी (High Bandwidth Memory - HBM) और AI की भूमिका: आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दौर है। AI मॉडल्स को ट्रेन करने और चलाने के लिए साधारण मेमोरी काम नहीं आती; इसके लिए हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की सख्त जरूरत होती है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ISM 2.0 के तहत एडवांस मेमोरी पैकेजिंग, विशेष रूप से HBM पर सबसे ज्यादा फोकस किया जाएगा। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जब पूरी दुनिया AI की तरफ भाग रही है, तो AI हार्डवेयर के निर्माण में भारत पीछे न छूट जाए।
- सप्लाई चेन की मजबूती (Supply Chain Resilience): भू-राजनीतिक तनाव, जैसे अमेरिका और चीन के बीच चल रहा ट्रेड वॉर, यह साबित करता है कि किसी एक देश पर निर्भर रहना कितना खतरनाक हो सकता है। ISM 2.0 का लक्ष्य घरेलू सप्लाई चेन को इतना मजबूत करना है कि भारत वैश्विक झटकों को आसानी से सह सके और दुनिया के लिए एक 'प्लस वन' (China Plus One) विकल्प बन सके।
बजट 2026-27 और वित्तीय प्रोत्साहन
सरकार ने अपनी मंशा को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि खजाना भी खोला है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ISM 2.0 को गति देने के लिए शुरुआती तौर पर ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। सरकार ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के 'फिजिकल लेयर' पर कब्जा जमाने के लिए 'इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (ECMS) का बजट बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है। इसके अतिरिक्त, फैब्रिकेशन और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए ₹8,000 करोड़ का अलग से आउटले रखा गया है। यह भारी-भरकम बजट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार लंबी रेस के लिए तैयार है।
रोजगार और कौशल विकास (Skill Generation)
चिप बनाने के लिए सिर्फ मशीनें नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे होनहार और प्रशिक्षित दिमागों की जरूरत होती है। यह एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है जहां नैनोमीटर (Nanometer) के स्तर पर काम होता है। भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, लेकिन सेमीकंडक्टर स्पेसिफिक टैलेंट अभी सीमित है। ISM 2.0 में 'इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर' स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि इंडस्ट्री और यूनिवर्सिटीज मिलकर काम करेंगे। इंजीनियरिंग के छात्रों को कॉलेज के समय से ही चिप डिजाइनिंग और फैब्रिकेशन की एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि पढ़ाई पूरी करते ही वे सीधे फैब (Fab) यूनिट्स में काम करने के लिए तैयार हों।
चुनौतियां जो अभी भी सामने हैं
तमाम उत्साहजनक घोषणाओं के बावजूद यह रास्ता आसान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती है 'प्रौद्योगिकी नियंत्रण' (Technology Controls)। कई विकसित देश अपनी एडवांस चिप मेकिंग तकनीक किसी दूसरे देश को आसानी से नहीं देना चाहते। इसके अलावा भारत को अपने बुनियादी ढांचे—जैसे 24 घंटे निर्बाध बिजली, लाखों लीटर अति-शुद्ध पानी (Ultra-pure water) और डस्ट-फ्री क्लीनरूम्स—को विश्व स्तरीय बनाए रखना होगा। छोटी सी भी चूक करोड़ों रुपये के वेफर्स को बर्बाद कर सकती है। साथ ही, चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियां भी अपने यहां चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अरबों डॉलर की सब्सिडी दे रही हैं। ऐसे में भारत को वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अपनी नीतियों को निरंतर लचीला और आकर्षक बनाए रखना होगा।
वैश्विक परिदृश्य और भारत का भविष्य
क्लाउड सोवरेन्टी (Cloud Sovereignty) और डेटा लोकलाइजेशन के इस दौर में, जो देश अपना हार्डवेयर खुद बनाएगा, वही भविष्य का सिकंदर होगा। भारत का विजन सिर्फ अपनी जरूरतों को पूरा करना नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर बनना है। जब विदेशी कंपनियां ग्लोबल क्लाउड सर्विस प्रोवाइड करने के लिए भारतीय डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करेंगी, तो उन सर्वर्स में लगने वाले चिप्स भी भविष्य में 'मेड इन इंडिया' होंगे। यह 2047 के विकसित भारत के सपने की एक बहुत मजबूत ईंट है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 सिर्फ क्षमता विस्तार का कार्यक्रम नहीं है; यह एक छलांग है। यह असेंबली लाइन के निचले पायदान से उठकर इनोवेशन, बौद्धिक संपदा (IP) और डीप-टेक मैन्युफैक्चरिंग के शीर्ष पर पहुंचने की भारत की महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। अगर सभी नीतियां सही तरीके से जमीन पर उतारी गईं, तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया भर के सबसे एडवांस गैजेट्स में भारतीय डिजाइन और भारत में बनी चिप्स धड़क रही होंगी।
सरकारी नीतियों और इस मिशन की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए आप Press Information Bureau (PIB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नवीनतम प्रेस विज्ञप्ति पढ़ सकते हैं।
India Semiconductor Mission 2.0 (ISM 2.0) क्या है?
ISM 2.0 भारत सरकार द्वारा 2026 के केंद्रीय बजट में शुरू किया गया एक उन्नत प्रोग्राम है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर बनाने की मशीनरी, कच्चे माल का निर्माण करना और अपना खुद का चिप डिजाइन (Full-Stack Indian IP) विकसित करना है, ताकि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत बन सके।
ISM 2.0 के लिए सरकार ने कितना बजट आवंटित किया है?
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने ISM 2.0 के लिए ₹1,000 करोड़ का शुरुआती बजट रखा है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के बजट को बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है।
ISM 1.0 और ISM 2.0 में मुख्य रूप से क्या अंतर है?
ISM 1.0 बुनियादी ढांचा तैयार करने और मुख्य रूप से चिप्स की असेंबली तथा पैकेजिंग (ATMP/OSAT) पर केंद्रित था। इसके विपरीत, ISM 2.0 का फोकस बहुत अधिक एडवांस चीजों पर है, जैसे हाई-एंड चिप डिजाइनिंग, चिप बनाने वाले उपकरणों का स्वदेशी निर्माण और एडवांस मेमोरी (HBM) पैकेजिंग।
चिप्स के निर्माण में हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) का क्या महत्व है?
वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का दायरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। AI सिस्टम्स को भारी मात्रा में डेटा प्रोसेस करने के लिए साधारण मेमोरी चिप्स की बजाय हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की आवश्यकता होती है। ISM 2.0 के तहत इसी तकनीक पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
